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बजट : 2026 में कुछ हुआ सस्ता तो कुछ हुई महंगी

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया। केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने एक तरफ़ मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और ग्रीन एनर्जी को राहत दी है, तो दूसरी तरफ शेयर बाज़ार से जुड़े निवेश और कुछ गतिविधियों को महंगा किया है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी है जिससे भारतीय बाज़ार में ये दवाएं सस्ती हो जाएंगी। इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से मंगवाई जाने वाली दवाओं पर भी सरकार ने ड्यूटी हटा दी है।

माइक्रोवेव ओवन के कुछ जरूरी पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है. सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट की सीमा 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है।लेदर, सिंथेटिक जूते और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में भी ड्यूटी-फ्री इनपुट और समयसीमा को बढ़ाया गया है। इससे इनके सस्ते होने की संभावना है।न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए आयात होने वाले उपकरणों पर 2035 तक कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगीसरकार ने बिजली से चलने वाली गाड़ियों, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी उत्पादन पर भी टैक्स कम करने का प्रयास किया है।लिथियम-आयन बैटरी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कई इनपुट्स को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है। सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाले सोलर ग्लास के कच्चे माल सोडियम एंटीमोनेट पर भी ड्यूटी हटा दी गई है। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर एनर्जी और बैटरी सेक्टर में उत्पादन लागत घट सकती है। हालांकि ये फ़ायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा या नहीं, ये कंपनियों की नीतियां निर्धारित करेंगी।दरअसल, इन बदलावों से उत्पादन लागत तो घटेगी लेकिन ग्राहक मूल्य घटेगा या नहीं, ये फ़ैसला कंपनियां लेंगी। ट्रेडिंग करना महंगा होगा। कंपनियों के शेयर बायबैक पर प्रमोटर्स के लिए टैक्स स्ट्रक्चर सख़्त किया गया है। अब प्रमोटर्स को कैपिटल गेन टैक्स के साथ अतिरिक्त टैक्स भी देना होगा, जिससे बायबैक के ज़रिए मुनाफ़ा निकालना कम आकर्षक हो सकता है। कुछ केमिकल्स जैसे पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड और कुछ उपभोक्ता सामानों पर पहले मिलने वाली कस्टम ड्यूटी छूट ख़त्म कर दी गई है। इन पर अब 7.5% तक बेसिक कस्टम ड्यूटी लगेगी, जिससे इनका लैंडेड कॉस्ट बढ़ेगा।रसायनों के महंगे होने का असर इनसे बनने वाले उत्पादों की क़ीमतों पर पड़ सकता है।यानी कुल मिलाकर बजट 2026 में मिनरल्स, स्क्रैप, शराब महंगे हुए हैं। जबकि लेदर, कपड़ा, सिंथेटिक फुटवियर, विदेशी यात्रा, कैंसर की 17 दवाएं, माइक्रोवेव ओवन, एयरक्राफ्ट निर्माण से जुड़ी चीजें, EV बैटरी, शुगर की दवाएं वगैरह सस्ते होने की उम्मीद है।

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