Wed. Oct 28th, 2026

गढ़वाली गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शक मंत्रमुग्ध

देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित उत्तराखंड कौथिग में बुधवार को लोक संस्कृति, संगीत और जनसेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। रेंजर्स कॉलेज मैदान में आयोजित सांस्कृतिक गीत संध्या में प्रसिद्ध लोकगायकों ने गढ़वाली गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, दिन में आयोजित विद्यालयों की सामूहिक गढ़वाली गीत प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कौथिग स्थल पर आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 164 लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराकर लाभ उठाया। कार्यक्रम का शुभारंभ शाम छह बजे पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि अखिल गढ़वाल सभा उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गीत संध्या की शुरुआत प्रसिद्ध लोकगायक सौरभ मैठाणी ने भजन ‘तू रेंदी मां, तू रेहदी ऊंचा पहाड़ों मा’ और ‘मी पहाड़ों कु रैबासी, तू दिल्ली रौण वाली’ की प्रस्तुति से की। उनके गीतों ने पहाड़ की मिट्टी, भावनाओं और प्रवास की पीड़ा को जीवंत कर दिया। लोकगायिका मंजू सुंदरियाल ने ‘कब आलू मंगसीर मैना’ और ‘मैना घस्यारी’ जैसे गीतों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद गजेंद्र राणा ने अपने लोकप्रिय गीत ‘जय हो नंदा देवी, तेरी जय बोला’ और ‘बबली तेरो मोबाइल’ सहित अन्य गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया।लोकगायिका रेशमा शाह ने महासू देवता की स्तुति और ‘चलो चारों धाम’ गीत से धार्मिक आस्था का रंग जमाया। वहीं, बिशन हरियाला ने ‘उत्तरायणी कौथिग’ और ‘पुष्पा लुकी रे’ गीत प्रस्तुत कर माहौल को उल्लासपूर्ण बना दिया। सौरभ मैठाणी ने दोबारा मंच संभालते हुए ‘जख औंदी हवा सररर’, ‘बांज लखड़ू घास का ब्वारा’ और ‘सपना सयाली’ जैसे गीत सुनाए। बिशन हरियाला ने ‘गोरखा चेली भागुणी’ की प्रस्तुति दी। गजेंद्र राणा ने ‘हीरा समधानी’ और ‘नी रैयेन्दू मैसी, ढोंढा पड़िगे भैंसी’ जैसे गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *