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राहुल ने किया राजनैतिक मर्यादाओं को तार तार: भाजपा

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देहरादून। भाजपा ने राष्ट्रपति से मुलाकात के संदर्भ में राहुल गांधी द्वारा झूठ बोलने को राजनीति में नैतिक पतन की पराकाष्ठा बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा कि एससीआर के बाद जीते केरल के कांग्रेसी मंत्री, सांसद इस प्रक्रिया को सही ठहरा रहे हैं, लेकिन इसके ठीक उलट, उनका शीर्ष नेतृत्व जनता को गुमराह करने की सभी सीमाएं लांघ रहा है। वहीं तंज किया कि बिना ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के प्रदेश में लोकसभा विधानसभा के 5 चुनाव हारने वाली कांग्रेस को कोई आयोग या आयुक्त नहीं जिता सकता है सिवाय जनता के। उन्होंने बयान जारी कर, कल राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के बाद राहुल गांधी द्वारा बैठक के संदर्भ में बोले गए झूठे तथ्यों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने उनके बयानों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि विपक्ष द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए झूठ बोलते बोलते, देश के शीर्ष संवैधानिक पद को भी घसीटा गया। वही सच तो यह है कि जिस एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस और विपक्ष दिल्ली में हंगामा कर रहा है उसी की तारीफ में केरल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और कई मंत्री थकते नहीं नजर आ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस और विपक्ष को चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोप लगाने के बजाय अपनी राजनीतिक विफलताओं का आत्ममंथन करना चाहिए। क्योंकि जिस ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है, उनके कार्यभार संभालने से पहले ही कांग्रेस वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव हार चुकी थी। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस सत्ता हासिल नहीं कर सकी। उत्तराखंड में भी कांग्रेस को वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। तब न ज्ञानेश कुमार इस स्थिति के लिए जिम्मेदार थे और न ही वर्तमान चुनाव आयुक्त की भूमिका थी। इन चुनावों में जनता ने कांग्रेस को नकारा था और पार्टी को इस राजनीतिक सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए। वहीं कटाक्ष किया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष का विरोध सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास है। हमारा मानना है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर बात होनी चाहिए। केवल संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने से कांग्रेस की चुनावी स्थिति नहीं सुधरने वाली है। क्योंकि चुनावी राजनीति में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी कसौटी है। कांग्रेस को यह समझना होगा कि चुनाव आयोग का विरोध करना और उसके अधिकारियों के इस्तीफे की मांग करना किसी भी राजनीतिक दल की चुनावी सफलता की गारंटी नहीं हो सकता। ज्ञानेश कुमार के स्थान पर कोई अन्य अधिकारी आ जाए, तब भी कांग्रेस की चुनावी किस्मत केवल व्यक्ति या पदाधिकारी बदलने से नहीं बदलेगी। उन्होंने कल आए आसाम, बंगाल, तमिलनाडु के चुनाव परिणामों पर कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कहा कि वहां भाजपा को शानदार जीत हासिल हुई, लेकिन कांग्रेस के हाथ शून्य लगा। क्योंकि के शीर्ष नेता मेहनत नहीं करते और रात दिन झूठ बोलकर आत्ममुग्ध होकर नकारत्मक राजनीति में जुटे हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं की राजनीति अब जनसंपर्क, जनसेवा और जमीनी मेहनत के बजाय आरोप-प्रत्यारोप, भ्रम और सुविधानुसार राजनीति तक सीमित होती दिखाई देती है। कांग्रेस की राजनीति में गंभीर विचार-विमर्श और जनहित के ठोस मुद्दों के स्थान पर केवल विरोध की राजनीति हावी है। सच यह है कि वीकेंड की राजनीति और बयानों के सहारे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच जाना, उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना आवश्यक है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाने और चुनावी हार के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति छोड़कर आत्ममंथन करे। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता का विश्वास जीतने के लिए जनहित में काम करना, स्पष्ट विचार रखना तथा अपनी नीतियों और कार्यों के प्रति जवाबदेह होना आवश्यक है।

 

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