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कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई करें

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा की और पुलिस को प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों को जनपद एवं पुलिस हेडक्वार्टर स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग कर शीघ्र निस्तारित करने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रदेश में अभियोजन और फॉरेंसिक जांचों के लिए विभागीय सिस्टम को और मजबूत किए जाने पर बल दिया, ताकि इसकी प्रगति और मॉनिटरिंग अच्छे से की जा सके। उन्होंने कहा कि ई-समन व्यवस्था को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी एवं एसएसपी स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गृह/पुलिस विभाग के अंतर्गत वादों के निस्तारण के लिए थाना और तहसील दिवस आयोजन भी शुरू किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम इसके लिए एसओपी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सचिव गृह, सचिव राजस्व, मंडलायुक्त एवं पुलिस विभाग मिलकर एसओपी तैयार करें। उन्होंने कहा कि मामलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह 2 से 3 कैम्प आयोजित किए जा सकते हैं। मुख्य सचिव ने थानों में जमा जब्त वाहनों की नीलामी कर खाली कराया जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लम्बित मामलों से संबंधित वाहनों के डिस्पोजल के लिए और क्या किया जा सकता है, इसे एक्स्प्लोर कर लिया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पॉक्सो के मामलों पर तत्काल कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम लगातार अपने पैर पसार रहा है । इसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई और सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर्स को और अधिक मजबूत किए जाने की बात कही। साथ ही ड्रग्स के ख़िलाफ़ लगातार कार्रवाई करते हुए एनकॉर्ड की मासिक बैठकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभाग तत्काल वांछित रिपोर्ट भेजे । मुख्य सचिव ने कहा कि मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन प्लेटफार्म को अधिक से अधिक प्रचारित किया जाए। उन्होंने कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में भी इसका अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों द्वारा ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं इसकी भी निगरानी की जाए। बड़े सरकारी अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए कुछ बेड रिज़र्व किए जाने की संभावनाओं का परीक्षण कराया जा सकता है।

 

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