भारत-चीन सीमा व्यापार का शुभारंभ
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले के धारचूला स्थित ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे से वर्ष 2026 के भारत-चीन सीमा व्यापार का औपचारिक शुभारंभ हो गया। इससे पहले इस व्यापार को वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी और सीमा पर बढ़े तनाव के चलते रोक दिया गया था, जो अब 6 साल के अंतराल के बाद दोबारा शुरू हुआ है।भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारियों और 4 हेल्परों सहित 20 सदस्यीय पहला भारतीय व्यापारिक दल चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के तकलाकोट पहुंचा। यहां से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद व्यापारिक गतिविधियां शुरू हुईं। उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि फिलहाल चीन प्रशासन ने केवल पहले से पंजीकृत और पूर्व में व्यापार कर चुके व्यापारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी है। आगामी व्यापारिक दलों के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय जारी है।उन्होंने बताया किभारतीय बाजार से चीन के लिए गुड़, मिश्री, तंबाकू और चीनी, मैदा, चावल, घी, वनस्पति तेल और विभिन्न मसाले, रेडीमेड कपड़े, ऊनी कपड़े, कालीन और स्थानीय कुमाऊँनी हस्तशिल्प, सौंदर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक्स), स्टेशनरी का सामान, बर्तन, पूजा-पाठ की सामग्री और मूर्तियां निर्यात की जा सकेगी, जबकि चीन से कच्ची ऊन (पश्मीना और तिब्बती ऊन) तथा याक की पूंछ (चँवर), कालीन, तिब्बती जड़ी-बूटियां और रोंगबा (स्थानीय जूते), चीनी मिट्टी के बर्तन, मूर्तियां और कांच के सजावटी उत्पाद, चीनी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, खिलौने और टॉर्च आयात किये जा सकेंगे। सीमा व्यापार के पुनः शुरू होने से सीमांत क्षेत्र के पारंपरिक व्यापार, स्थानीय व्यापारियों की आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
