सुनंदा महोत्सव की तैयारियां जोरों पर
बागेश्वर। देवभूमि उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का प्रतीक नंदा-सुनंदा महोत्सव इस वर्ष भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित होने जा रहा है। बागेश्वर जिले के नुमाइशखेत मैदान में 31 अगस्त से शुरू होने जा रहे इस महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह आयोजन लगातार 26 वर्षों से परंपरागत रूप से किया जा रहा है और अब यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन चुका है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता का उत्सव भी है। आज सुबह परंपरा के अनुरूप भक्तगण ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तिमय माहौल के बीच नुमाइशखेत मैदान से चौरासी गांव के लिए रवाना हुए। श्रद्धालु वहां पहुंचकर पूरे हर्षोल्लास के साथ हरीश बिष्ट के घर से कदली वृक्ष लेकर लौटे। यही कदली वृक्ष मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयुक्त किया जाएगा। महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मूर्तियों का निर्माण इसी कदली वृक्ष से किया जाएगा और पूरे विधि-विधान के साथ 31 अगस्त को महोत्सव का शुभारंभ होगा। महोत्सव समिति की अध्यक्ष कंचन साह ने कहा कि नंदा महोत्सव स्थानीय आस्था और लोकसंस्कृति का प्रतीक है। इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं और मां नंदा-सुनंदा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ यह महोत्सव सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊर्जा भी प्रदान करता है। वहीं, स्थानीय पंडित देवेंद्र जोशी का कहना है कि नंदा-सुनंदा महोत्सव न केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित है बल्कि इसके माध्यम से समाज की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव को भी बल मिलता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेलों का आयोजन होता है, जिनमें जिलेभर के लोग उत्साह के साथ भाग लेते हैं। हरीश बिष्ट ने कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और उनके लिए यह गर्व का विषय है कि उनके घर से मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के लिए पवित्र वृक्ष लिया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में महोत्सव में शामिल होकर इस आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाने में अपनी भागीदारी निभाएं। नंदा-सुनंदा महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। साथ ही पारंपरिक लोकनृत्य और लोकगीत महोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। बच्चों और युवाओं के लिए मेले का विशेष आकर्षण रहेगा। महोत्सव समिति ने जिलेभर के लोगों से इस आयोजन में सम्मिलित होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि हमारी लोकसंस्कृति की विरासत और सामूहिक एकता का दर्पण है। बागेश्वर के इस ऐतिहासिक नंदा-सुनंदा महोत्सव का आगाज 31 अगस्त को होगा और इसके साथ ही जिले की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना एक बार फिर उत्सव के रंगों से सराबोर हो उठेगी।
