मूल निवास 1950 और सशक्त भू- कानून की मांग को लेकर सड़कों पर उमड़ा जन सैलाब
समाचार इंडिया/देहरादून। मूल निवास स्वाभिमान महारैली में शामिल हुए प्रदेशभर के लोग विभिन्न संगठनों के बैनर तले सुबह 10 बजे देहरादून के परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए। मूल निवास स्वाभिमान महारैली के लिए भले ही भू कानून समन्वय संघर्ष समिति, प्रदेश की संस्कृति के ध्वजवाहक लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, अखिल भारतीय समानता मंच, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी, उत्तराखंड क्रांति दल, विभिन्न आंदोलनकारी, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक दलों, युवा संगठनों ने आह्वान किया था, लेकिन परेड ग्राउंड में सभी एकाकार हो गए। यहां से हुजूम रैली की शक्ल में कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक पहुंचा। इस दौरान महारैली में ढोल-दमाऊ, डौंर आदि के माध्यम से उत्तराखंड और उत्तराखंडियत को जागृत करने वाले जनगीत गए। शहीद समारक पर भी तमाम वक्ताओं ने कहा कि क्यों मूल निवास 1950 और सशक्त भू- कानून की जरूरत है। उत्तराखंड में राज्य स्थापना के बाद से ही हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून लागू की मांग उठने लगी थी। जिसमें सबसे पहले वर्ष 2002 में सरकार की तरफ से प्रावधान किया गया कि राज्य के भीतर अन्य राज्य के लोग सिर्फ 500 वर्ग मीटर की जमीन ही खरीद सकते हैं। इस प्रावधान में वर्ष 2007 में एक संशोधन कर दिया गया और 500 वर्ग मीटर की जगह 250 वर्ग मीटर की जमीन खरीदने का मानक रखा गया। 06 अक्टूबर 2018 को भाजपा की तत्कालीन सरकार ने संशोधन करते हुए नया अध्यादेश प्रदेश में लाने का काम किया। उसमें उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि सुधार अधिनियम 1950 में संशोधन करके दो और धाराएं जोड़ी गई। जिसमें धारा 143 और धारा 154 के तहत पहाड़ों में भूमि खरीद की अधिकतम सीमा को ही समाप्त कर दिया गया। यानी राज्य के भीतर बाहरी लोग जितनी चाहे जमीन खरीद सकते हैं। राज्य सरकार की मंशा थी की इस नियम में संशोधन करने के बाद राज्य में निवेश और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन अब सरकार के इस फैसले का विरोध होने लगा है। इसके साथ ही राज्य में मूल निवास की अनिवार्यता 1950 करने की मांग की गई है। वर्ष 1950 से राज्य में रह रहे लोगों को ही मूल निवासी/स्थाई निवासी माने जाने की मांग उठ रही है। मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि यह उत्तराखंड की जनता की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई है। सरकार की ओर से विभिन्न माध्यमों से संघर्ष समिति से जुड़े सदस्यों से संपर्क कर रैली का टालने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि हम सरकार की इस पहल और सक्रियता का सम्मान करते हैं, लेकिन यह जन आंदोलन है, जिसका नेतृत्व उत्तराखंड की आम जनता कर रही है। इसलिए इस आंदोलन से संबंधित कोई भी फैसला आम जनता के बीच से ही निकलेगा। इस मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भू कानून को लेकर स्पष्ट किया कि हमारी सरकार राज्य निर्माण की मूल अवधारणा के संरक्षण को लेकर कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कठोरतम नकल निरोधक और धर्मांतरण कानून के बाद मूल निवासियों के हित में सख्त भू कानून भी भाजपा सरकार ही लेकर आएगी।
