जन महाभियोग और रैली, चुनाव में नकारी पार्टियों का जमावड़ा: भट्ट
देहरादून। भाजपा ने विपक्ष के जन महाभियोग और 1 नवंबर की रैली को चुनाव में हारी और नकारी हुई पार्टियों की हताशा एवं निराशा करार दिया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया, जिन्होंने संसद को सड़क बनाने की कोशिश की वही सड़क पर संसद का नाटक रच रहे हैं। जनता देख रही है कि जिन्होंने वोट के अधिकार को घुसपैठियों के हाथों में सौंपकर देश को असुरक्षित किया था, देश और वोट बचाने का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के दावों पर तंज किया कि प्रदेश में न उनके पास संगठन है, न लोग उन्हें स्वीकारते हैं, लिहाजा उनके लिए तो अभी दिल्ली और देहरादून दोनों बहुत दूर हैं।उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम तथा 1 नवंबर को होने जा रही ‘देश बचाओ, वोट बचाओ’ महारैली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से जनता का विश्वास हासिल करने में बार-बार विफल होने वाले अब पूरी संवैधानिक चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करने पर तुल गए हैं। उन्होंने कल दिल्ली में होने वाली विपक्ष की रैली को संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश की कड़ी बताया। जिसमें आरोप लगाया कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष चुनाव में हार की हताशा और जनता द्वारा नकारे जाने की निराशा में यह सब कर रहा है। क्योंकि जिस चुनाव आयोग और आयुक्त को लेकर विपक्ष झूठ फैला रहा है, उसी के संरक्षण में कांग्रेस की देश में 4 सरकारों को मिलकर कुल 7 राज्यों में विपक्ष की सरकारें चल रही हैं। लेकिन विपक्ष वोट चोरी का नैरेटिव फैलाकर एसआईआर की संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है। जिसमें बहुत बड़ा कारण है, मृत एवं घुसपैठियों के नाम जोड़कर, फर्जी वोटिंग अपने पक्ष में करवाने की साजिशों का रुकना है। इन्हीं लोगों ने सरकार में रहते मतदान का अधिकार घुसपैठियों को देकर उनसे वोट चोरी करवाई और देश की सुरक्षा को खतरे में डाला। अब बहुत बेशर्मी से दिल्ली में देश बचाने वोट बचाने का झूठा प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। उनका एकमात्र मकसद, चुनाव आयोग जैसी लोकतांत्रिक व संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर अराजकता फैलाना। भट्ट ने रैली की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ये सब 1984 के सिख दंगों की बरसी पर की जा रही है और आयोजक है इस नरसंहार की आरोपी। उन्होंने आरोप लगाया कि 1 नवंबर को कांग्रेस द्वारा रैली आयोजित करना 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। वहीं उत्तराखंड से इस रैली में कांग्रेसियों की भागीदारी के दावों पर तंज कसते हुए कहा कि देश की तरह प्रदेश में भी कांग्रेस का कोई संगठन नहीं और न ही समर्पित कार्यकर्ता हैं। वहीं लोकसभा एवं विधानसभा के लगातार 5 चुनाव भी स्पष्ट करते हैं कि प्रदेश की जनता उनके पक्ष में नहीं है। लिहाजा वो कौन से लोग हैं जिन्हें प्रदेश कांग्रेस के नेता दिल्ली रैली में ले जा रही है। उन्होंने व्यंग किया कि कांग्रेस के लिए अभी दिल्ली भी बहुत दूर है और देहरादून भी। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि देश की जनता के पास अपना वोट है और वही अपने देश एवं प्रदेश की सरकार का चयन करेंगे। इससे पहले भी विपक्ष नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका को दोहराने वाली विदेशी स्क्रिप्ट के कई हिस्सों को देश में प्रस्तुत कर चुका है और जनता ने सभी को फ्लॉप किया है।
