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मछली पालन युवाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतर विकल्प : डीएम

बागेश्वर। जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने  कपकोट तहसील अंतर्गत जगथाना मत्स्य जीवी समिति में संचालित ट्राउट मछली पालन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्लस्टर आधारित मत्स्य पालन मॉडल की सराहना करते हुए इसे ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बताया।
जिलाधिकारी ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में कृषि के साथ-साथ आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने मत्स्य विभाग को अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं और किसानों को इस गतिविधि से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मत्स्य पालन के अतिरिक्त उद्यानिकी एवं अन्य कृषि आधारित गतिविधियों की भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। जिलाधिकारी ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र में तीन से चार संभावित क्लस्टर चिन्हित कर स्थानीय जलवायु के अनुरूप फसलों की संभावनाओं का अध्ययन करने तथा एक माह के भीतर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
मत्स्य अधिकारी मनोज मियान ने बताया कि जनपद की 20 समितियां वर्तमान में मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं, जो सामूहिक रूप से लगभग 70 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जगथाना समिति अकेले प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही है। बताया कि ट्राउट मछली की बाजार में लगातार मांग बनी हुई है, जिसके कारण यह लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय हो रही है।

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