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अमर शहीद को किया नमन

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टिहरी गढ़वाल। टिहरी जनक्रांति के नायक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद श्रीदेव सुमन को 109वीं जयंती पर याद किया गया। उनके पैतृक गांव जौल में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने सुमन की मूर्ति पर माल्यार्पण कर टिहरी के लोगों के लिए उनकी कुर्बानी को याद किया गया। वहीं चंबा ब्लॉक सभागार में सुमन जयंती पर कवि सम्मेलन एवं गोष्ठी का का आयोजन किया गया। कवियों ने कविताओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। रविवार को टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और अन्य जनप्रतिनिधियों ने चंबा ब्लॉक के जौल गांव पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व क्रांतिकारी श्रीदेव सुमन की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। विधायक किशोर ने कहा कि टिहरी से राजशाही को खत्म करने में सुमन ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया था। वह स्वाधीनता सेनानी, पत्रकार और प्रखर वक्ता था। छोटी से उम्र में उन्होंने इतिहास लिख दिया था। संयुक्त टिहरी प्रांत के लिए उनकी कुर्बानी हर युग में याद रखी जाएगी। चाहिए। विधायक ने कहा कि जौल गांव में श्रीदेव सुमन राज्य विश्वविद्यालय का परिसर बनाया जाएगा। वहीं टिहरी झील का नाम भी सुमन सागर किया जाएगा। ।
बाइट किशोर उपाध्याय विधायक टिहरी
चंबा ब्लॉक सभागार में रीति-रैमाण ग्रुप की ओर से सुमन जयंती पर कवि सम्मेलन और गोष्ठी में कवियों ने श्री देव सुमन के त्याग , साहस ओर बलिदान के बारे में जानकारी दी गई ।साहित्यकार एवं कवि महिपाल नेगी ने श्री देव सुमन की तुलना भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से की उन्होंने कहा की श्री देव सुमन से टिहरी राजशाही के साथ-साथ अंग्रेज हुकूमत भी डरी हुई थी यही कारण रहा है कि श्रीदेव सुमन को अंग्रेजों शासकों ने और टिहरी राजशाही द्वारा अपनी कारागार में बंद में बंद रखा। महीपाल नेगी ने श्री देव सुमन की रचित कविताओं, और अपनी पत्नी को जेल से लिखी चिट्ठी आदि का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कहा कि छोटी सी उम्र में उन्होंने बडा इतिहास लिखा। 84 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की, जिससे तत्कालीन टिहरी रियासत को राजशाही से मुक्ति मिली और लोग आजाद हुए।वरिष्ठ कवि सोमवारी लाल सकलानी ने श्री देव सुमन के जीवन के बारे में कविताएं के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी उन्होंने बताया कि राजशाही द्वारा उन्हें किस तरह से प्रताड़ित किया गया और 84 दिन की भूख हड़ताल से उनकी मृत्यु हुई तो उनके शव को परिजनों को न देकर भिलंगना नदी में फेंक दियाबाइट सोमबारी लाल सकलानी।कार्यक्रमके आयोजकरीति-रैमाण ग्रुप के सुनील डंगवाल ने बताया कि क्षेत्र के सामाजिकग संगठनों द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है उन्होंने सरकार से मांग की की श्री देव सुमन जी के जन्मदिन को को सरकारी स्तर पर मनाया जाए ।मनबाइट सुनील डंगवाल आयोजक जनक्रांति के नायक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद श्रीदेव सुमन को 109वीं जयंती पर याद किया गया। उनके पैतृक गांव जौल में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने सुमन की मूर्ति पर माल्यार्पण कर टिहरी के लोगों के लिए उनकी कुर्बानी को याद किया गया। वहीं चंबा ब्लॉक सभागार में सुमन जयंती पर कवि सम्मेलन एवं गोष्ठी का का आयोजन किया गया। कवियों ने कविताओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी।
रविवार को टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और अन्य जनप्रतिनिधियों ने चंबा ब्लॉक के जौल गांव पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व क्रांतिकारी श्रीदेव सुमन की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। विधायक किशोर ने कहा कि टिहरी से राजशाही को खत्म करने में सुमन ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया था। वह स्वाधीनता सेनानी, पत्रकार और प्रखर वक्ता था। छोटी से उम्र में उन्होंने इतिहास लिख दिया था। संयुक्त टिहरी प्रांत के लिए उनकी कुर्बानी हर युग में याद रखी जाएगी। चाहिए। विधायक ने कहा कि जौल गांव में श्रीदेव सुमन राज्य विश्वविद्यालय का परिसर बनाया जाएगा। वहीं टिहरी झील का नाम भी सुमन सागर किया जाएगा। ।
बाइट किशोर उपाध्याय विधायक टिहरी
चंबा ब्लॉक सभागार में रीति-रैमाण ग्रुप की ओर से सुमन जयंती पर कवि सम्मेलन और गोष्ठी में कवियों ने श्री देव सुमन के त्याग , साहस ओर बलिदान के बारे में जानकारी दी गई ।साहित्यकार एवं कवि महिपाल नेगी ने श्री देव सुमन की तुलना भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से की उन्होंने कहा की श्री देव सुमन से टिहरी राजशाही के साथ-साथ अंग्रेज हुकूमत भी डरी हुई थी यही कारण रहा है कि श्रीदेव सुमन को अंग्रेजों शासकों ने और टिहरी राजशाही द्वारा अपनी कारागार में बंद में बंद रखा। महीपाल नेगी ने श्री देव सुमन की रचित कविताओं, और अपनी पत्नी को जेल से लिखी चिट्ठी आदि का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कहा कि छोटी सी उम्र में उन्होंने बडा इतिहास लिखा। 84 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की, जिससे तत्कालीन टिहरी रियासत को राजशाही से मुक्ति मिली और लोग आजाद
वरिष्ठ कवि सोमवारी लाल सकलानी ने श्री देव सुमन के जीवन के बारे में कविताएं के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी उन्होंने बताया कि राजशाही द्वारा उन्हें किस तरह से प्रताड़ित किया गया और 84 दिन की भूख हड़ताल से उनकी मृत्यु हुई तो उनके शव को परिजनों को न देकर भिलंगना नदी में फेंक दिया oबाइट सोमबारी लाल सकलानी कार्यक्रमके आयोजकरीति-रैमाण ग्रुप के सुनील डंगवाल ने बताया कि क्षेत्र के सामाजिक संगठनों द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है उन्होंने सरकार से मांग की की श्री देव सुमन जी के जन्मदिन को को सरकारी स्तर पर मनाया जाए ।

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