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मटर और गेहूं की फसल पर मंडराया संकट

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समाचार इंडिया/उत्त्तरकाशी। सीमांत जनपद में मटर की फसल के साथ ही अब गेहूं की फसल पर भी संकट मंडराने लगा है। वर्षा न होने के कारण सूखा पड़ना शुरू हो चुका है। वहीं बर्फबारी न होने से सेब की बागवानी को बड़ा नुकसान होने का अनुमान है। उत्तरकाशी के किसानों की नगदी फसल में शामिल मटर की फसल तो मुरझाने लगी है। मटर की फसल को 30 से 40 प्रतिशत नुकसान होने और गेहूं की फसल को 20-25 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। अगर वर्षा नहीं हुई तो बीज के पैसे भी वसूल नही होंगें। जनपद में 40 हजार से अधिक किसान मटर और गेहूं की खेती करते हैं। मटर की फसल जनपद में नगदी फसल के रूप में बोई जाती है। यहां करीब 15 से 18 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है। इसकी सप्लाई दिल्ली, मेरठ, देहरादून सहित कई मंडियों में होती है। सबसे अधिक उत्पादन पुरोला, नौगांव, चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में होता है। यहां इस फसल की बुआई 15 से 30 नवंबर के बीच हो गई थी। इसके बाद से अपेक्षित वर्षा नहीं हुई है। शीतकाल में नमी के कारण फसल उगी तो है और फूल आ चुके हैं पर फसल मुरझाने लगी हैं। गेंहू की फसल की भी यही स्तिथि है। उद्यान विभाग की माने तो वर्षा न होने के कारण नुकसान की प्रतिषता बढ़ सकती है।

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